टेस्ट क्रिकेट का ढाँचा कैसे काम करता है
टेस्ट मैच में दो टीमें होती हैं, हर टीम को अधिकतम दो पारियाँ खेलने का मौका मिलता है। मैच पाँच दिनों में होता है और हर दिन तीन सत्र — सुबह, दोपहर, शाम — खेले जाते हैं। टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाज़ी या गेंदबाज़ी का फ़ैसला करती है। अगर कोई टीम पहली पारी में बड़ी बढ़त बना ले, तो वह 'फ़ॉलो-ऑन'
भी लागू कर सकती है। पिच का मिजाज़, मौसम और सत्र के हिसाब से रणनीति बदलती रहती है — यही बात टेस्ट क्रिकेट को बाकी प्रारूपों से अलग करती है। कानपुर जैसे शहरों में क्रिकेट प्रेमी इस प्रारूप की बारीकियों को खूब समझते हैं।